हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना गया है, खासकर जब बात फाल्गुन अमावस्या की हो। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन पितरों को समर्पित होता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा, तर्पण और पितृ निवारण स्तोत्र का पाठ करने से पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है और कुंडली में मौजूद पितृ दोष के दुष्प्रभाव कम होते हैं।

पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में फाल्गुन अमावस्या 17 मार्च को पड़ रही है। हालांकि तिथि का सटीक समय स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। अमावस्या के दिन प्रातः स्नान कर पितरों का स्मरण करना और तिल, कुश तथा जल से तर्पण करना अत्यंत शुभ माना गया है।

ज्योतिष मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके जीवन में बार-बार बाधाएं, मानसिक अशांति और कार्यों में रुकावटें आती हैं। ऐसे में इस दिन पितृ निवारण स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और परिवार में सुख-शांति का वातावरण बनता है।

इसके अलावा जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र दान करना, पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाना और पशु-पक्षियों को भोजन कराना भी पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से किए गए इन उपायों से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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