सूर्य ग्रहण को हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण खगोलीय और आध्यात्मिक घटना माना जाता है। मान्यता है कि ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इसलिए ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धिकरण करना जरूरी बताया गया है। ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं के अनुसार केवल स्नान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कुछ अन्य उपाय भी किए जाने चाहिए।

ग्रहण खत्म होते ही सबसे पहले स्नान करना चाहिए। यदि संभव हो तो स्नान के पानी में गंगाजल मिलाएं। इससे शारीरिक और मानसिक शुद्धि मानी जाती है। इसके बाद घर की अच्छी तरह सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें। खासकर पूजा स्थान को साफ कर दीपक जलाएं और भगवान सूर्य की आराधना करें।

ग्रहण के दौरान बने भोजन को त्याग देना उचित माना जाता है। ताजा भोजन बनाकर ही ग्रहण के बाद सेवन करना चाहिए। इसके अलावा मंत्र जाप, विशेष रूप से गायत्री मंत्र या ‘ॐ सूर्याय नमः’ का जप करना शुभ माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के बाद दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

इन उपायों को श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से मन में शांति और जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है।

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