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ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है। ये आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन जीवन पर गहरा असर डालने वाले ग्रह माने जाते हैं। अक्सर इनके नाम से लोग डर जाते हैं, जबकि ज्योतिष के अनुसार राहु-केतु डराने के नहीं, बल्कि जीवन की दिशा बदलने वाले ग्रह हैं।

राहु को अचानक सफलता, दुनिया की चमक-दमक और तेज उछाल का कारक माना जाता है। कई बार राहु व्यक्ति को कम समय में बड़ी ऊंचाइयों तक पहुंचा देता है, लेकिन साथ ही अहंकार और भ्रम से सबक भी सिखाता है। वहीं केतु को आध्यात्मिकता, आत्मचिंतन और अंदर की सच्चाई से जोड़कर देखा जाता है। केतु व्यक्ति को भौतिक मोह से दूर करके मानसिक शांति और आत्मिक विकास की ओर ले जाता है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार राहु-केतु का प्रभाव हर व्यक्ति की कुंडली और ग्रह स्थिति पर निर्भर करता है। सही स्थिति में ये जीवन में सफलता, नई सोच और आत्मिक उन्नति दिला सकते हैं, जबकि कमजोर स्थिति में भ्रम, तनाव और अचानक उतार-चढ़ाव भी ला सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन ग्रहों से डरने की बजाय इनके संकेतों को समझना जरूरी है। सही मार्गदर्शन और सकारात्मक सोच से राहु-केतु व्यक्ति को नई दिशा और गहरी समझ प्रदान कर सकते हैं।



 4 फरवरी का दिन कई राशियों के लिए प्रेम और रिश्तों के लिहाज से खास संकेत लेकर आया है। ज्योतिषाचार्य चिराग दारूवाला के अनुसार आज मिथुन और वृश्चिक राशि के लोगों को नए रोमांटिक अवसर मिल सकते हैं, जिससे उनकी लव लाइफ में उत्साह और ताजगी बनी रहेगी। वहीं मेष, कर्क समेत कुछ राशियों को अपने दिल की बात खुलकर कहने और रिश्तों में ईमानदारी दिखाने की सलाह दी गई है।

आज कर्क, धनु और कुछ अन्य राशियों के लिए भावनाओं को व्यक्त करने के अच्छे मौके बन सकते हैं। जिन लोगों के रिश्तों में दूरी या गलतफहमी चल रही थी, उनके लिए बातचीत के जरिए संबंध सुधारने का समय है। सिंगल लोगों को भी किसी खास व्यक्ति से मुलाकात होने के संकेत मिल सकते हैं।

हालांकि तुला, मीन और कुछ राशियों को आज लव लाइफ में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। छोटी-छोटी बातों पर विवाद या गलतफहमी से बचने की जरूरत है। धैर्य और समझदारी से काम लेने पर रिश्ते मजबूत हो सकते हैं।

ज्योतिष के अनुसार आज का दिन प्यार में संतुलन और समझदारी बनाए रखने का है। खुली बातचीत, भरोसा और सकारात्मक सोच से रिश्तों में मधुरता बनी रह सकती है।

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झारखंड के हजारीबाग जिले के बरकट्ठा स्थित सूर्यकुंड धाम अपनी अद्भुत धार्मिक मान्यताओं और प्राकृतिक विशेषताओं के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। इसे एशिया के सबसे गर्म जल कुंडों में से एक माना जाता है, जहां पांच अलग-अलग गर्म जल स्रोत मौजूद हैं। मान्यता है कि इस पवित्र स्थल का संबंध रामायण काल से जुड़ा हुआ है, जिससे इसकी आस्था और महत्व और भी बढ़ जाता है।

सूर्यकुंड धाम में हर साल हजारों श्रद्धालु दर्शन और स्नान के लिए पहुंचते हैं। खासतौर पर संतान प्राप्ति की मन्नत लेकर आने वाले भक्त यहां आंवला पूजा और विशेष अनुष्ठान करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां जरूर फल देती है, इसलिए दूर-दूर से दंपति अपनी इच्छाएं लेकर यहां पहुंचते हैं।

धार्मिक मान्यता के साथ-साथ यह स्थान प्राकृतिक दृष्टि से भी खास है। कुंड का पानी अत्यंत गर्म होता है और सालभर समान तापमान बनाए रखता है, जो इसे एक अनोखा धार्मिक और पर्यटन स्थल बनाता है।

प्रशासन और स्थानीय समितियां यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं का भी ध्यान रखती हैं। सूर्यकुंड धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन को भी बढ़ावा देता है।

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 सूर्य ग्रहण 2026 को लेकर लोगों के मन में कई धार्मिक सवाल उठ रहे हैं, जिनमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ग्रहण के दौरान सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए या नहीं। शास्त्रों और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल को संवेदनशील समय माना जाता है, इसलिए इस दौरान सूर्य को जल अर्पित करना उचित नहीं बताया गया है।

धार्मिक परंपराओं में माना जाता है कि ग्रहण के समय सूर्य की ऊर्जा कमजोर होती है और वातावरण में नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकता है। इसी कारण सूतक काल से लेकर ग्रहण समाप्त होने तक पूजा-पाठ, भोजन और कुछ धार्मिक क्रियाओं से परहेज करने की सलाह दी जाती है। नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देने वाले लोगों के लिए भी यही सुझाव है कि वे ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करके शुद्ध मन से अर्घ्य दें।

खगोलीय दृष्टि से सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक घटना है, जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को ढक लेता है। हालांकि धार्मिक आस्था और परंपराएं इसे विशेष समय मानती हैं और नियमों का पालन करने पर जोर देती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि परंपरा और आस्था का सम्मान करते हुए वैज्ञानिक समझ भी जरूरी है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान, दान और सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है।

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