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Holi 2026 Vastu Tips: होली सिर्फ रंगों और उल्लास का त्योहार नहीं, बल्कि नकारात्मकता को समाप्त कर नई ऊर्जा के स्वागत का प्रतीक भी है। धार्मिक परंपरा के अनुसार Holi से पहले घर की सफाई और अनुपयोगी वस्तुओं को हटाना शुभ माना जाता है। वास्तु शास्त्र के जानकारों का कहना है कि कुछ चीजें घर में रुकी ऊर्जा और आर्थिक बाधा का कारण बन सकती हैं।

सबसे पहले, सूखे या मुरझाए पौधे घर में नकारात्मकता का संकेत माने जाते हैं। इन्हें तुरंत हटाकर हरे-भरे पौधे लगाना बेहतर होता है।

दूसरा, टूटे जूते-चप्पल। यह जीवन में ठहराव और संघर्ष का प्रतीक माने जाते हैं। पुराने और अनुपयोगी फुटवियर को घर में जमा न रखें।

तीसरा, टूटा शीशा या बर्तन। टूटा कांच मानसिक अशांति और विवाद को बढ़ा सकता है। ऐसे सामान को तुरंत बाहर करना चाहिए।

चौथा, खंडित देवी-देवताओं की मूर्तियां। धार्मिक मान्यता है कि टूटी मूर्तियां घर में रखना शुभ नहीं होता। इन्हें सम्मानपूर्वक जल या पवित्र स्थान पर विसर्जित करना चाहिए।

पांचवां, खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान। लंबे समय से बंद पड़े या खराब उपकरण घर में अव्यवस्था और ऊर्जा रुकावट का कारण बनते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि होली से पहले इन वस्तुओं को हटाकर घर में नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जा सकता है। साफ-सुथरा और व्यवस्थित घर न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि समृद्धि के रास्ते भी खोलता है।


 Chandra Grahan 2026: इस वर्ष होली के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण विशेष माना जा रहा है, क्योंकि यह भारत में भी दिखाई देगा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका सूतक काल भी मान्य होगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक यह ग्रहण “ग्रस्तोदय” रूप में नजर आएगा, जिसे लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है।

ग्रस्तोदय चंद्र ग्रहण का अर्थ है कि जब चंद्रमा उदय होगा, उस समय वह पहले से ही ग्रहण से ग्रस्त अवस्था में होगा। यानी चंद्रमा के निकलते ही उसका कुछ हिस्सा छाया में दिखाई देगा। सामान्य शब्दों में कहें तो ग्रहण की प्रक्रिया चंद्रमा के उदय से पहले शुरू हो चुकी होगी।

धार्मिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण को विशेष माना जाता है। मान्यता है कि ग्रहण के दौरान वातावरण में सूक्ष्म परिवर्तन होते हैं, इसलिए इस समय मंत्र जप, ध्यान और ईश्वर स्मरण को श्रेष्ठ बताया गया है। वहीं सूतक काल ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले शुरू माना जाता है। सूतक के दौरान पूजा-पाठ, भोजन पकाने और शुभ कार्यों से परहेज करने की परंपरा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को ग्रहण के समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के कारण घटित होती है।

धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक तथ्य दोनों को समझते हुए इस चंद्र ग्रहण को सकारात्मक दृष्टि से देखना चाहिए। ग्रहण के बाद स्नान, दान और भगवान के नाम का स्मरण शुभ माना गया है।


 Holashtak 2026: फाल्गुन मास में होली से पहले आने वाला होलाष्टक इस वर्ष 25 फरवरी से प्रारंभ हो रहा है। ये आठ दिन आध्यात्मिक साधना और विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। मान्यता है कि इन दिनों मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश या नया व्यापार शुरू करना वर्जित होता है, क्योंकि ग्रहों की स्थिति कुछ उग्र मानी जाती है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार होलाष्टक की कथा भक्त प्रह्लाद और भगवान विष्णु से जुड़ी है। प्रह्लाद की अटूट भक्ति ने उन्हें हर संकट से बचाया। इसी कारण इन दिनों विष्णु की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, होलाष्टक के दौरान विष्णु सहस्रनाम का पाठ, नारायण कवच का श्रवण और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप मानसिक शांति प्रदान करता है। मान्यता है कि इससे ग्रहों की नकारात्मकता शांत होती है और जीवन में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।

इन आठ दिनों में सात्विक आहार, संयम और सेवा भाव अपनाने की भी सलाह दी जाती है। घर में नियमित दीपक जलाना, तुलसी के पास प्रार्थना करना और जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना गया है।

धर्माचार्यों का कहना है कि होलाष्टक को भय का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और भक्ति का समय मानना चाहिए। सच्ची श्रद्धा और सकारात्मक सोच के साथ की गई पूजा जीवन में संतुलन और शांति ला सकती है।

 

Nakaratmak Urja Ke Sanket: कई बार घर सुंदर और व्यवस्थित होने के बावजूद अंदर प्रवेश करते ही मन भारी लगने लगता है। बिना किसी स्पष्ट कारण के चिड़चिड़ापन, बेचैनी या थकान महसूस होना इस बात का संकेत हो सकता है कि घर की ऊर्जा संतुलित नहीं है। पारंपरिक मान्यताओं जैसे वास्तु शास्त्र और फेंग शुई में माना गया है कि स्थान की ऊर्जा व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि घर में बार-बार छोटी दुर्घटनाएं हों, इलेक्ट्रॉनिक सामान जल्दी खराब हो जाएं, पौधे सूखने लगें या बिना वजह तनाव बना रहे, तो इसे नकारात्मक ऊर्जा के संकेतों में गिना जाता है। इसके अलावा घर में घुसते ही बदबू आना, घुटन महसूस होना या लगातार नींद न आना भी संकेत हो सकते हैं।

कुछ लोग बताते हैं कि ऐसे माहौल में परिवार के सदस्यों के बीच झगड़े बढ़ जाते हैं और आर्थिक रुकावटें भी सामने आती हैं। हालांकि इन बातों को अंधविश्वास की बजाय जीवनशैली, सफाई और मानसिक स्थिति से जोड़कर देखना अधिक व्यावहारिक माना जाता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घर में नियमित सफाई, धूप-हवा का प्रवेश, टूटे सामान को हटाना और सकारात्मक गतिविधियां बढ़ाना वातावरण को हल्का बना सकता है। यदि लगातार नकारात्मकता महसूस हो रही हो तो आध्यात्मिक अभ्यास या ध्यान भी लाभकारी हो सकता है।