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 रिश्तों में अक्सर ऐसा होता है कि कोई अपना अचानक दूर हो जाता है। दिल में सवाल उठता है – क्या वह वापस आएगा? यह सवाल नींद और मन को बेचैन कर देता है। ऐसे समय में प्रेमानंद जी महाराज के जीवन मंत्र बेहद मददगार साबित होते हैं।

प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, जब कोई आपको छोड़कर चला जाए, तो उसके पीछे भागने के बजाय खुद को मजबूत बनाना जरूरी है। वे सिखाते हैं कि रिश्तों में संतुलन और आत्मसम्मान होना आवश्यक है। अगर आप स्वयं के भीतर स्थिरता और आत्मसम्मान पा लेते हैं, तो रिश्तों की दिशा अपने आप बदलने लगती है। कई बार सामने वाला तभी लौटता है, जब उसे आपकी गैर-मौजूदगी और आपकी कीमत का एहसास होता है।

उनके 6 प्रमुख प्रेम सूत्र इस प्रकार हैं:

  1. – अपने सम्मान को कभी कम न होने दें।

  2.  भावनाओं पर नियंत्रण रखना सीखें।

  3. – जीवन में स्वयं को प्राथमिकता दें।

  4. – विपरीत परिस्थितियों में भी आशावादी रहें।

  5. – रिश्तों में भावनाओं और तर्क दोनों का संतुलन रखें।

  6.  खुश रहना और जीवन को आगे बढ़ाना खुद की जिम्मेदारी समझें।

प्रेमानंद जी महाराज का मानना है कि प्रेम किसी की मजबूरी नहीं होना चाहिए। जब आप इन सूत्रों को अपनाते हैं, तो न केवल आपका मन शांत रहता है, बल्कि रिश्तों में बेहतर समझ और स्थिरता भी आती है।


 1 फरवरी, 2026 को माघ पूर्णिमा का पावन दिन है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत, स्नान और दान करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव, समृद्धि और सुख आता है। ज्योतिष और धार्मिक विद्वानों के अनुसार, माघ पूर्णिमा का दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है और इस दिन किए गए उपाय लंबी अवधि तक लाभ पहुंचाते हैं।

सबसे पहले, ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी है। ऐसा करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि मन और आत्मा भी शुद्ध होती है। यदि नदी या सरोवर दूर हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।

माघ पूर्णिमा पर इन पांच सरल उपायों से जीवन की परेशानियों से मुक्ति मिल सकती है:

  1. दान-पुण्य: जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र या कंबल देना शुभ माना गया है।

  2. दीपदान: किसी भी मंदिर या घर में दीप जलाना सकारात्मक ऊर्जा लाता है।

  3. संतों का आशीर्वाद: गुरुओं और वरिष्ठ व्यक्तियों का आशीर्वाद लेना लाभकारी होता है।

  4. मंत्र जाप: किसी पवित्र मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है।

  5. व्रत और संयम: इस दिन उपवास रखने से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, माघ पूर्णिमा पर इन उपायों को श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से न केवल संपत्ति और सुख में वृद्धि होती है, बल्कि तनाव, चिंता और नकारात्मकता भी दूर होती है।


 हिंदू धर्म में मां सरस्वती को ज्ञान, कला और संगीत की देवी माना जाता है। उनका आशीर्वाद प्राप्त करना छात्रों और कलाकारों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसा कहा जाता है कि बसंत पंचमी के दिन या रोजाना पढ़ाई या काम शुरू करने से पहले मां सरस्वती के नामों का जाप करने से बुद्धि, स्मरण शक्ति और ज्ञान में वृद्धि होती है।

शास्त्रों में देवी सरस्वती के बारह विशेष नामों का उल्लेख है, जिन्हें “द्वादश नाम” कहा जाता है। इन नामों का नियमित रूप से जाप करने से न केवल व्यक्ति की बुद्धि जागृत होती है, बल्कि उसकी वाणी में भी मधुरता और प्रभाव आता है। माना जाता है कि जो व्यक्ति मंदबुद्धि या ध्यान में कमी महसूस करता है, उसके लिए यह जाप विशेष लाभकारी होता है।

विद्वानों के अनुसार, द्वादश नामों का पाठ श्रद्धा और सही भाव से करने पर मानसिक स्थिरता, रचनात्मक शक्ति और ज्ञान प्राप्ति में मदद मिलती है। इसके अलावा, यह जाप व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास भी लाता है।

मां सरस्वती के इन बारह नामों में शामिल हैं: सरस्वती, शारदा, वाणी, वीणापाणि, ब्रह्मचारिणी, महाशक्ति, महाकव्या, ज्ञानदा, जगदम्बा, महायोगिनी, महाविद्या और विद्यावती।

इसलिए, पढ़ाई, कला, संगीत या किसी भी ज्ञान कार्य की शुरुआत से पहले इन द्वादश नामों का नियमित जाप करना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा करने से व्यक्ति न केवल ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि करता है, बल्कि उसके जीवन में सकारात्मकता और सफलता भी आती है।


 हम रोज़ाना खाना खाते हैं, लेकिन अक्सर जल्दी में, मोबाइल या टीवी देखते हुए भोजन कर लेते हैं. वहीं, भारतीय संस्कृति में भोजन को सिर्फ शरीर की आवश्यकता नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और मानसिक ऊर्जा का स्रोत माना गया है. हिंदू शास्त्रों में अन्न को ‘अन्न ब्रह्म’ कहा गया है और इसे देवी अन्नपूर्णा और भगवान विष्णु से जोड़ा गया है. इसलिए खाने से पहले और बाद के नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है.

भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, भोजन से जुड़ी ये परंपराएं न केवल धार्मिक हैं, बल्कि हमारे मन और जीवन को संतुलित रखने में भी मदद करती हैं. शास्त्रों में कहा गया है कि जिस भाव और मानसिक स्थिति के साथ भोजन किया जाता है, उसका असर शरीर और जीवन दोनों पर पड़ता है. गुस्से या तनाव में खाया भोजन शरीर को पूर्ण पोषण नहीं देता, जबकि शांत मन और श्रद्धा से किया गया भोजन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है.

शास्त्रों के अनुसार, भोजन करते समय ध्यान और संयम बनाए रखना चाहिए, मोबाइल या अन्य व्याकुलताओं से बचना चाहिए. खाने के समय नमक, पानी और भोजन को उचित तरीके से ग्रहण करना भी शुभ माना गया है. इन नियमों को अपनाने से न केवल स्वास्थ्य सुधरता है, बल्कि मन शांत रहता है, सोच स्पष्ट होती है और जीवन में संतुलन आता है.

संक्षेप में, भोजन केवल पेट भरने का माध्यम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा की ऊर्जा को संतुलित करने वाला कर्म है. इसलिए शास्त्रों के इन नियमों का पालन करना आज भी बेहद जरूरी माना जाता है.