भारतीय संस्कृति में आशीर्वाद देने की परंपरा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। आपने अक्सर देखा होगा कि बड़े-बुजुर्ग किसी को आशीर्वाद देते समय दाहिने हाथ का ही प्रयोग करते हैं। पूजा-पाठ, दान, तिलक या किसी शुभ कार्य में भी दाहिने हाथ को प्राथमिकता दी जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दाहिना हाथ सूर्य और बृहस्पति ग्रह से संबंधित माना जाता है। सूर्य ऊर्जा, आत्मबल और सकारात्मकता का प्रतीक है, जबकि बृहस्पति ज्ञान और आशीर्वाद के कारक ग्रह माने जाते हैं। मान्यता है कि दाहिने हाथ से आशीर्वाद देने पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार अधिक प्रभावी ढंग से होता है। योग शास्त्र में भी दाहिने भाग को ‘पिंगला नाड़ी’ से जोड़ा गया है, जो शक्ति और सक्रियता का प्रतिनिधित्व करती है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो अधिकांश लोग दाहिने हाथ से काम करते हैं, इसलिए यह हाथ अधिक मजबूत और नियंत्रित होता है। शरीर का दाहिना हिस्सा मस्तिष्क के बाएं भाग द्वारा संचालित होता है, जो तर्क और निर्णय क्षमता से जुड़ा है। इस कारण दाहिने हाथ की गतिविधियां अधिक संतुलित मानी जाती हैं।
सांस्कृतिक रूप से भी दाहिने हाथ को शुद्ध और शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना गया है, जबकि बाएं हाथ को सामान्य दैनिक कार्यों से जोड़ा गया है। यही वजह है कि आशीर्वाद जैसी पवित्र क्रिया के लिए दाहिने हाथ का प्रयोग परंपरा बन गया है।
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