जब जिंदगी तनाव, उलझन और भावनात्मक दबाव से घिर जाती है, तो लोग मानसिक सहारे की तलाश करते हैं। ऐसे में “ओम नमः शिवाय” मंत्र का जप केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन से भी जोड़ा जा रहा है। भगवान शिव को समर्पित यह पंचाक्षरी मंत्र अब ध्यान और माइंडफुलनेस की तरह अपनाया जा रहा है।

भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, नियमित मंत्र जाप मन की चंचलता को कम करता है और विचारों में स्थिरता लाता है। उनका कहना है कि ध्वनि कंपन (साउंड वाइब्रेशन) मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं, जिससे गुस्सा और बेचैनी में कमी आ सकती है।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि किसी शब्द या मंत्र को दोहराना ध्यान (मेडिटेशन) की प्रक्रिया जैसा है। इससे सांसों की गति नियंत्रित होती है और दिमाग एकाग्र होता है। हालांकि वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि गंभीर एंग्जायटी या डिप्रेशन की स्थिति में पेशेवर इलाज जरूरी है, मंत्र जाप उसका विकल्प नहीं बल्कि सहायक अभ्यास हो सकता है।

कई लोगों का अनुभव है कि रोज 5-10 मिनट “ओम नमः शिवाय” का जप करने से धैर्य बढ़ा, चिड़चिड़ापन कम हुआ और सोच अधिक सकारात्मक बनी।

आखिरकार, यह मंत्र केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्म-संवाद और आत्म-नियंत्रण का एक माध्यम बनता जा रहा है। नियमित अभ्यास और सच्ची नीयत के साथ किया गया जाप मन को स्थिर करने में मददगार हो सकता है।

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