रमजान का पाक महीना शुरू होते ही इबादत और रूहानियत का माहौल बन जाता है। मस्जिदों में नमाजियों की तादाद बढ़ जाती है, घरों में सेहरी और इफ्तार की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस्लाम में रोजा पांच बुनियादी फर्जों में शामिल है और इसे आत्म-संयम व तक़वा हासिल करने का जरिया माना गया है। पवित्र ग्रंथ कुरआन में रोजे का मकसद इंसान को परहेजगार और जिम्मेदार बनाना बताया गया है।
रमजान का पाक महीना शुरू होते ही इबादत और रूहानियत का माहौल बन जाता है। मस्जिदों में नमाजियों की तादाद बढ़ जाती है, घरों में सेहरी और इफ्तार की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस्लाम में रोजा पांच बुनियादी फर्जों में शामिल है और इसे आत्म-संयम व तक़वा हासिल करने का जरिया माना गया है। पवित्र ग्रंथ कुरआन में रोजे का मकसद इंसान को परहेजगार और जिम्मेदार बनाना बताया गया है।


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