भारतीय संस्कृति में जब कोई बुजुर्ग सिर पर हाथ रखकर “सदा खुश रहो” या “सफल रहो” कहता है, तो उस स्पर्श में अपनापन और ऊर्जा का एहसास होता है। खास बात यह है कि आशीर्वाद प्रायः दाहिने हाथ से ही दिया जाता है। इसे केवल परंपरा नहीं, बल्कि ज्योतिष, योग और मनोविज्ञान से जुड़ी मान्यता माना जाता है।

भारतीय ज्योतिष में शरीर के दाहिने भाग को सूर्य से संबंधित माना गया है। सूर्य ऊर्जा, आत्मविश्वास, नेतृत्व और जीवन शक्ति का प्रतीक है। मान्यता है कि दाहिना हाथ सक्रिय ऊर्जा का माध्यम होता है। इसलिए जब कोई दाहिने हाथ से आशीर्वाद देता है, तो वह अपनी सकारात्मक ‘सौर ऊर्जा’ सामने वाले तक पहुंचाता है।

योग शास्त्र में शरीर की नाड़ियों—इड़ा और पिंगला—का उल्लेख मिलता है। पिंगला नाड़ी को सूर्य और सक्रियता से जोड़ा जाता है, जो शरीर के दाहिने हिस्से से संबंधित मानी जाती है। इस आधार पर दाहिना हाथ कर्म, शक्ति और सकारात्मक प्रवाह का प्रतीक माना गया है।

व्यवहारिक विज्ञान के अनुसार, अधिकतर लोग दाहिने हाथ से काम करते हैं। यही हाथ अभिवादन, दान, सम्मान और आशीर्वाद जैसे सकारात्मक कार्यों के लिए स्वाभाविक रूप से प्रयोग होता है। इससे विश्वास और आत्मीयता की भावना भी मजबूत होती है।

धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और शुभ कार्यों में भी दाहिने हाथ का प्रयोग प्रमुख रूप से किया जाता है। समय के साथ यह आचरण सामाजिक आदत बन गया और पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहा।

इस तरह दाहिने हाथ से आशीर्वाद देने की परंपरा केवल रीति-रिवाज नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक मान्यताओं का मिश्रण है, जो आज भी समाज में उतनी ही सहजता से निभाई जाती है।

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