हिंदू धर्म में मंत्र जप की शुरुआत ‘ॐ’ से करना एक प्राचीन और गहरी आध्यात्मिक परंपरा मानी जाती है। सुबह के समय मंदिरों और घरों में जब मंत्रोच्चार होता है, तो अधिकतर मंत्र ‘ॐ’ से शुरू किए जाते हैं। सवाल उठता है कि क्या बिना ‘ॐ’ के मंत्र फल नहीं देते या यह केवल श्रद्धा का प्रतीक है। धार्मिक ग्रंथों और योग परंपरा के अनुसार ‘ॐ’ को ब्रह्मांड की मूल ध्वनि माना गया है, जो मन और चेतना को एकाग्र करने में मदद करती है।
हिंदू धर्म में मंत्र जप की शुरुआत ‘ॐ’ से करना एक प्राचीन और गहरी आध्यात्मिक परंपरा मानी जाती है। सुबह के समय मंदिरों और घरों में जब मंत्रोच्चार होता है, तो अधिकतर मंत्र ‘ॐ’ से शुरू किए जाते हैं। सवाल उठता है कि क्या बिना ‘ॐ’ के मंत्र फल नहीं देते या यह केवल श्रद्धा का प्रतीक है। धार्मिक ग्रंथों और योग परंपरा के अनुसार ‘ॐ’ को ब्रह्मांड की मूल ध्वनि माना गया है, जो मन और चेतना को एकाग्र करने में मदद करती है।


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