हरिद्वार। हिंदू पंचांग के अनुसार होलिका दहन से पहले शुरू होने वाले आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। मान्यता है कि ये दिन तंत्र-मंत्र साधना और मंत्र सिद्धि के लिए विशेष फलदायी होते हैं। वर्ष 2026 में होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी से होकर 3 मार्च (होलिका दहन) तक रहेगी।
हरिद्वार के ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री के अनुसार, सामान्य दिनों में किसी मंत्र को सिद्ध करने के लिए सवा लाख (1,25,000) जाप करने का विधान बताया गया है। लेकिन होलाष्टक के दौरान यदि श्रद्धा और विधि-विधान से 11,000 बार जाप किया जाए, तो उसे सवा लाख जाप के समान फलदायी माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि इन आठ दिनों में साधना करने से नकारात्मक ऊर्जा, टोना-टोटका और बाधाएं प्रभावहीन हो सकती हैं। साथ ही घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का वास होता है।
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ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
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पूजन स्थान पर दीप और धूप प्रज्वलित करें।
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अपने इष्ट देव का ध्यान कर मंत्र का संकल्प लें।
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एकाग्र मन से 11,000 जाप पूर्ण करें (माला के माध्यम से गिनती रखें)।
ध्यान रहे कि मंत्र सिद्धि के लिए नियम, संयम और सात्विक आहार का पालन आवश्यक माना गया है।


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