एक व्यक्ति अपने वैवाहिक जीवन में परेशान और दुखी था। वह अक्सर अपनी पत्नी के व्यवहार से नाराज हो जाता और तुरंत प्रतिक्रिया दे देता। धीरे-धीरे उसका मन अशांत होने लगा और घर का माहौल भी तनावपूर्ण हो गया।
यह देख संत कबीर ने उसे समझाया:
"मनुष्य! वैवाहिक जीवन में तू धैर्य रख, तुरंत प्रतिक्रिया मत दे। जैसे नदी अपने मार्ग में आने वाली छोटी-छोटी बाधाओं से थमती नहीं, वैसे ही तू भी किसी अस्थायी परेशानी से अपने मन को न खोए।"
संत कबीर ने आगे कहा:
"यदि तू हर छोटी बात पर क्रोध या विरोध करेगा, तो न केवल तेरा मन अशांत होगा, बल्कि प्रेम और समझदारी भी समाप्त हो जाएगी। धैर्य और संयम ही वैवाहिक जीवन की नींव हैं।"
इस शिक्षा को अपनाकर व्यक्ति ने:
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पहले गहरी सांस ली और शांत होकर स्थिति को समझा।
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तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय परिस्थिति का अवलोकन किया।
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अपनी पत्नी के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास किया।
कुछ समय बाद उसने महसूस किया कि घर में शांति और प्रेम दोनों बढ़ गए, और वैवाहिक जीवन सुखमय हो गया।


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