स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र हमें सिखाते हैं कि जब मनुष्य जीवन में सत्य और अच्छे विचारों को आत्मसात करता है, तो उसके कर्म स्वतः ही शुभ दिशा में प्रवाहित होने लगते हैं। विचार ही कर्मों का मूल होते हैं और कर्म ही हमारे जीवन की दिशा तय करते हैं।
स्वामी जी के अनुसार, सत्य केवल बोलने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विचार, वाणी और आचरण—तीनों में उसका समावेश होना आवश्यक है। जब मन में शुभ विचार होते हैं, तो व्यक्ति दूसरों के प्रति करुणामय, संयमित और न्यायपूर्ण बनता है।
अच्छे विचारों से जन्मे कर्म न केवल व्यक्तिगत जीवन को शुद्ध करते हैं, बल्कि समाज में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। यही कारण है कि सत्य और सद्विचार को अपनाने वाला व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और विवेक नहीं खोता।
स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के ये जीवन सूत्र हमें याद दिलाते हैं कि आंतरिक शुद्धता ही बाहरी सफलता का आधार है। जब जीवन में सत्य और सद्भाव का मार्ग चुना जाता है, तो शांति, संतुलन और आत्मिक उन्नति स्वतः प्राप्त होती है।

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