Holashtak 2026: फाल्गुन मास में होली से पहले आने वाला होलाष्टक इस वर्ष 25 फरवरी से प्रारंभ हो रहा है। ये आठ दिन आध्यात्मिक साधना और विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। मान्यता है कि इन दिनों मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश या नया व्यापार शुरू करना वर्जित होता है, क्योंकि ग्रहों की स्थिति कुछ उग्र मानी जाती है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार होलाष्टक की कथा भक्त प्रह्लाद और भगवान विष्णु से जुड़ी है। प्रह्लाद की अटूट भक्ति ने उन्हें हर संकट से बचाया। इसी कारण इन दिनों विष्णु की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, होलाष्टक के दौरान विष्णु सहस्रनाम का पाठ, नारायण कवच का श्रवण और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप मानसिक शांति प्रदान करता है। मान्यता है कि इससे ग्रहों की नकारात्मकता शांत होती है और जीवन में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।

इन आठ दिनों में सात्विक आहार, संयम और सेवा भाव अपनाने की भी सलाह दी जाती है। घर में नियमित दीपक जलाना, तुलसी के पास प्रार्थना करना और जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना गया है।

धर्माचार्यों का कहना है कि होलाष्टक को भय का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और भक्ति का समय मानना चाहिए। सच्ची श्रद्धा और सकारात्मक सोच के साथ की गई पूजा जीवन में संतुलन और शांति ला सकती है।

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