ब्रजभूमि की पावन नगरी वृंदावन में स्थित गोपेश्वर महादेव मंदिर आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम है। यह संभवतः देश का एकमात्र शिव मंदिर है, जहां भगवान शिव का श्रृंगार बिंदी, सिंदूर, चूड़ी और स्त्रियों के आभूषणों से किया जाता है। यहां महादेव गोपी स्वरूप में विराजमान हैं।
व ने गोपी अवतार?धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण वृंदावन में महारास रचा रहे थे, तब उस दिव्य रासलीला को देखने की इच्छा भगवान शिव को भी हुई। लेकिन रास में केवल गोपियों को ही प्रवेश की अनुमति थी।
तब शिवजी ने यमुना में स्नान कर गोपी का रूप धारण किया और रास में शामिल हुए। उनकी भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें ‘गोपेश्वर’ नाम दिया, जिसका अर्थ है—गोपियों के ईश्वर।
आज भी इस मंदिर में प्रतिदिन महादेव का श्रृंगार स्त्रियों की भांति किया जाता है। विशेष अवसरों पर उन्हें बिंदी, सिंदूर, चूड़ी, चुनरी और अन्य आभूषणों से सजाया जाता है। सावन और कार्तिक मास में यहां श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है।
गोपेश्वर महादेव मंदिर ब्रज की भक्ति परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है। मान्यता है कि वृंदावन की यात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती, जब तक भक्त गोपेश्वर महादेव के दर्शन न कर लें।
यह मंदिर इस सत्य का प्रतीक है कि भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं—यहां स्वयं देवों के देव महादेव ने प्रेम और भक्ति के लिए गोपी रूप धारण किया।


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