इस्लाम धर्म में शब-ए-बारात को बेहद मुकद्दस और इबादत की रात माना जाता है। यह शाबान महीने की 14वीं तारीख की रात और 15वीं तारीख के दिन मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात को अल्लाह की रहमतें बरसती हैं और लोग अपने गुनाहों की माफी मांगते हुए दुआ और इबादत में समय बिताते हैं।

शब-ए-बारात की तारीख चांद के दीदार पर निर्भर करती है। इसलिए अलग-अलग शहरों और देशों में चांद दिखने के आधार पर इसकी तिथि में अंतर हो सकता है। आमतौर पर मुस्लिम समुदाय स्थानीय मस्जिदों, धार्मिक संस्थानों या चांद कमेटियों की घोषणा के बाद ही इबादत की तैयारी शुरू करता है। सूर्यास्त के बाद चांद दिखने की संभावना रहती है, इसलिए लोग अपने शहर के चंद्रोदय और सूर्यास्त के समय पर विशेष ध्यान देते हैं।

इस रात लोग नफ्ल नमाज़, कुरान शरीफ की तिलावत, दुआ और जिक्र करते हैं। कई परिवार कब्रिस्तानों में जाकर अपने बुजुर्गों के लिए भी दुआ करते हैं और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा निभाते हैं। माना जाता है कि सच्चे दिल से की गई इबादत से दिल को सुकून और आध्यात्मिक शांति मिलती है।

धार्मिक जानकारों का कहना है कि शब-ए-बारात की सही तारीख और समय जानने के लिए अपने शहर की स्थानीय घोषणा और आधिकारिक चांद देखने वाली समितियों की सूचना पर भरोसा करना सबसे उचित होता है।

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