Kundalini Awakening Symptoms: क्या आपको ध्यान के दौरान शरीर में झनझनाहट, ऊर्जा का तेज प्रवाह या हवा में तैरने जैसा अनुभव होता है? योग परंपरा के अनुसार यह “कुंडलिनी जागरण” के संकेत हो सकते हैं। प्राचीन ग्रंथों में कुंडलिनी को रीढ़ की हड्डी के मूल में स्थित सर्पाकार सुप्त शक्ति बताया गया है, जो जागृत होने पर साधक के जीवन में गहरे परिवर्तन ला सकती है।
योग दर्शन के मुताबिक यह ऊर्जा मूलाधार चक्र से सहस्रार तक यात्रा करती है, जिससे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्तर पर बदलाव महसूस हो सकते हैं। हालांकि आधुनिक मनोविज्ञान इसे चेतना की परिवर्तित अवस्था (Altered State of Consciousness) के रूप में भी देखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिना मार्गदर्शन के गहन साधना जोखिम भरी हो सकती है। इसलिए संतुलित अभ्यास, अनुभवी गुरु का मार्गदर्शन और मानसिक स्थिरता बेहद जरूरी है। कुंडलिनी जागरण को रहस्यमय चमत्कार नहीं, बल्कि सजग और संतुलित आध्यात्मिक प्रक्रिया के रूप में समझना चाहिए।


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