कई बार व्यक्ति के जीवन में सब कुछ सामान्य चलता दिखाई देता है, लेकिन घर के भीतर एक अनकही बेचैनी बनी रहती है। बिना वजह तनाव, छोटी-छोटी बातों पर झगड़े, मन का अशांत रहना और बनते हुए कामों का बार-बार बिगड़ जाना—ये संकेत अक्सर घर में नकारात्मक ऊर्जा के बढ़ने की ओर इशारा करते हैं। ज्योतिष और भारतीय परंपरा के अनुसार, घर की शुभता केवल वास्तु दोष या भाग्य पर निर्भर नहीं करती, बल्कि हमारे कर्म, खानपान और व्यवहार से भी सीधा संबंध रखती है।
ज्योतिष मानता है कि इंसान के हर विचार और कर्म से एक विशेष ऊर्जा उत्पन्न होती है। जब घर के सदस्य सात्विक भोजन करते हैं, संयमित भाषा का प्रयोग करते हैं और आपसी सम्मान बनाए रखते हैं, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके विपरीत, अत्यधिक तामसिक भोजन, नशे की आदत, क्रोध, कटु वाणी और नकारात्मक सोच घर की शांति को धीरे-धीरे नष्ट कर देती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, घर में गंदगी, अव्यवस्था, टूटे-फूटे सामान को संभालकर रखना और पूजा या भोजन के स्थान पर लापरवाही भी अशुभता को बढ़ाती है। साथ ही, माता-पिता या बुजुर्गों का अपमान, अतिथि का अनादर और रोजमर्रा के जीवन में असंतुलित व्यवहार घर की ऊर्जा को भारी बना देता है।
धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि छोटी-छोटी सकारात्मक आदतें—जैसे साफ-सफाई, संयमित खानपान, सुबह-शाम दीप जलाना, मधुर वाणी और आपसी सहयोग—घर की नकारात्मकता को सकारात्मक ऊर्जा में बदल सकती हैं।
संक्षेप में, घर की किस्मत केवल ईंट-पत्थर या वास्तु से नहीं, बल्कि वहां रहने वालों की सोच, संस्कार और व्यवहार से बनती और बिगड़ती है।

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