यह नदी कलियुग में गंगा के समान पवित्र मानी जाती है। कहा जाता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से माही नदी में स्नान करता है, उसे गंगा स्नान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है।
संतों और ऋषियों ने इस क्षेत्र में तीन नदियों के संगम की विशेष महिमा बताई है। मान्यता है कि यहां माही नदी के साथ अन्य पवित्र जलधाराओं का संगम होने से यह स्थान आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शक्तिशाली बन जाता है। इसी कारण यहां स्नान, दान और तप का विशेष महत्व माना गया है।
स्थानीय जनमान्यता के अनुसार, माही नदी में स्नान करने से पापों का नाश, मानसिक शांति और आत्मिक शुद्धि होती है। यही वजह है कि माघ मास, गुप्त नवरात्रि और अन्य पावन अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु माही नदी के तट पर पहुंचकर स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं।
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