पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ रखा जा रहा है। माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला यह व्रत संकष्ठी चतुर्थी, तिल चतुर्थी और माघी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और विशेष रूप से माताएं अपने पुत्रों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और संकटों से रक्षा के लिए इसे करती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सकट चौथ का व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें निर्जल उपवास रखा जाता है। व्रती दिनभर उपवास रखकर रात में चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत का पारण करते हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देकर भगवान गणेश की विधिवत पूजा की जाती है और सकट चौथ की कथा सुनी जाती है, जिसे व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान गणेश पर भारी संकट आ गया था, तब माता पार्वती ने यह व्रत रखा और गणेश जी संकट से मुक्त हुए। तभी से यह व्रत संतान सुख और विघ्नों के नाश के लिए किया जाने लगा।

इस दिन पूजा में तिल, गुड़, मोदक और दूर्वा का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि सकट चौथ का व्रत करने से संतान संबंधी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

देशभर के मंदिरों में आज विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया है और श्रद्धालु भगवान गणेश से अपने परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं।

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