सूर्य ग्रहण 2026 को लेकर लोगों के मन में कई धार्मिक सवाल उठ रहे हैं, जिनमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ग्रहण के दौरान सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए या नहीं। शास्त्रों और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल को संवेदनशील समय माना जाता है, इसलिए इस दौरान सूर्य को जल अर्पित करना उचित नहीं बताया गया है।

धार्मिक परंपराओं में माना जाता है कि ग्रहण के समय सूर्य की ऊर्जा कमजोर होती है और वातावरण में नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकता है। इसी कारण सूतक काल से लेकर ग्रहण समाप्त होने तक पूजा-पाठ, भोजन और कुछ धार्मिक क्रियाओं से परहेज करने की सलाह दी जाती है। नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देने वाले लोगों के लिए भी यही सुझाव है कि वे ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करके शुद्ध मन से अर्घ्य दें।

खगोलीय दृष्टि से सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक घटना है, जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को ढक लेता है। हालांकि धार्मिक आस्था और परंपराएं इसे विशेष समय मानती हैं और नियमों का पालन करने पर जोर देती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि परंपरा और आस्था का सम्मान करते हुए वैज्ञानिक समझ भी जरूरी है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान, दान और सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है।

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