महाशिवरात्रि 2026 के अवसर पर भगवान शिव के श्रृंगार और उससे जुड़े आध्यात्मिक रहस्यों को लेकर भक्तों में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महादेव का प्रत्येक श्रृंगार—जटाएं, चंद्रमा, गंगा, त्रिशूल, डमरू और भस्म—गहरे आध्यात्मिक संदेशों को दर्शाता है। इन प्रतीकों को जीवन में संतुलन, संयम और आत्मचिंतन का प्रतीक माना जाता है।
ज्योतिष और धार्मिक ग्रंथों में ‘3’ अंक का भगवान शिव से विशेष संबंध बताया गया है। शिव का त्रिनेत्र, त्रिशूल के तीन शूल, तीन लोकों का संरक्षण और सृष्टि के तीन तत्व—सृजन, पालन और संहार—इस अंक की महत्ता को दर्शाते हैं। धार्मिक विद्वानों का कहना है कि यह अंक जीवन के संतुलन और आध्यात्मिक जागरूकता का प्रतीक है।
महाशिवरात्रि के दिन भक्त व्रत रखते हैं, रुद्राभिषेक करते हैं और रातभर जागरण कर भगवान शिव की आराधना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है। इस वर्ष भी मंदिरों में विशेष पूजा, भजन और धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी जोरों पर है। भक्तों का मानना है कि महादेव के श्रृंगार और उनके प्रतीकों का गहरा अर्थ समझने से जीवन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है।

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