भारतीय सनातन परंपरा में सिर के पीछे रखी जाने वाली शिखा (चोटी) को केवल बालों का गुच्छा नहीं, बल्कि धर्म, अनुशासन और आत्मचेतना का प्रतीक माना गया है। वैदिक काल से ही विशेष रूप से ब्राह्मणों के लिए शिखा धारण करना धार्मिक पहचान और कर्तव्यबोध का संकेत माना जाता रहा है। वेद, गृह्यसूत्र और धर्मसूत्रों में इसका उल्लेख मिलता है, जहां शिखा व्यक्ति को ज्ञान, संयम और सामाजिक उत्तरदायित्व की याद दिलाने का माध्यम बताई गई है।
भारतीय सनातन परंपरा में सिर के पीछे रखी जाने वाली शिखा (चोटी) को केवल बालों का गुच्छा नहीं, बल्कि धर्म, अनुशासन और आत्मचेतना का प्रतीक माना गया है। वैदिक काल से ही विशेष रूप से ब्राह्मणों के लिए शिखा धारण करना धार्मिक पहचान और कर्तव्यबोध का संकेत माना जाता रहा है। वेद, गृह्यसूत्र और धर्मसूत्रों में इसका उल्लेख मिलता है, जहां शिखा व्यक्ति को ज्ञान, संयम और सामाजिक उत्तरदायित्व की याद दिलाने का माध्यम बताई गई है।

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