हस्तरेखा शास्त्र में हथेली के अलग-अलग हिस्सों को व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य से जोड़ा जाता है। इन्हीं में से तर्जनी उंगली के नीचे मौजूद क्षेत्र को गुरु पर्वत कहा जाता है, जिसे नेतृत्व क्षमता, सम्मान और करियर ग्रोथ का संकेत माना जाता है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, इस पर्वत की बनावट व्यक्ति के आत्मविश्वास, फैसले लेने की क्षमता और जीवन में मिलने वाले अवसरों के बारे में संकेत दे सकती है।

अगर गुरु पर्वत संतुलित और उभरा हुआ दिखाई देता है, तो ऐसे लोग आमतौर पर नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ते हैं और जिम्मेदारी उठाने से नहीं डरते। पढ़ाई या नौकरी में वे अक्सर टीम लीडर या महत्वपूर्ण पदों पर नजर आते हैं। वहीं यदि यह हिस्सा बहुत अधिक उभरा हो, तो इसे कभी-कभी अहंकार या जल्दबाजी के संकेत से भी जोड़ा जाता है। दूसरी ओर, यदि गुरु पर्वत दबा या सपाट दिखे, तो व्यक्ति में आत्मविश्वास की कमी या निर्णय लेने में झिझक देखी जा सकती है।

हस्तरेखा विशेषज्ञों का कहना है कि गुरु पर्वत के साथ-साथ हथेली की अन्य रेखाएं और संकेत भी महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी हथेली का अध्ययन जरूरी माना जाता है। ध्यान रहे कि ये मान्यताएं पारंपरिक ज्योतिषीय दृष्टिकोण पर आधारित हैं और इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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