नई दिल्ली। तांत्रिक साधना और सिद्धियों के लिए विशेष मानी जाने वाली माघ गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी 2026 से प्रारंभ हो चुकी है, जो 27 जनवरी 2026 तक चलेगी। इन नौ दिनों में देवी के दस महाविद्या स्वरूपों की गुप्त रूप से आराधना की जाती है, इसलिए इसे ‘गुप्त नवरात्रि’ कहा जाता है।
आज पहले दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाएगी, जिसके लिए दो अत्यंत शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पहला मुहूर्त सुबह के समय और दूसरा दोपहर के बाद उपलब्ध रहेगा। साधक अपनी सुविधा अनुसार इनमें से किसी भी समय कलश स्थापना कर सकते हैं।
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर साफ मिट्टी की वेदी बनाकर जौ बोएं। इसके ऊपर कलश स्थापित करें, जिसमें जल, सुपारी, दूर्वा, सिक्का और आम के पत्ते डालें। कलश के ऊपर नारियल रखें और लाल वस्त्र से ढक दें। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर मां दुर्गा का आह्वान करें और दस महाविद्याओं का ध्यान करें।
इन नौ दिनों में साधक विशेष मंत्र-जाप, हवन और तांत्रिक अनुष्ठान करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई साधना से आर्थिक संकट दूर होते हैं, बाधाएं कटती हैं और इच्छाओं की पूर्ति होती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गुप्त नवरात्रि में साधना गोपनीय रखनी चाहिए और सात्विक आहार, संयम तथा नियमों का पालन करना चाहिए।

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