योध्या, मंदिरों और मूर्तियों की नगरी, आज भी कई प्राचीन और त्रेताकालीन स्थलों की वजह से विख्यात है। इनमें गुरु वशिष्ठ का आश्रम भी शामिल है, जहां प्रभु राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न ने शिक्षा प्राप्त की थी। यह आश्रम राम जन्मभूमि और राम मंदिर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित है।

त्रेतायुग से जुड़ी इस ऐतिहासिक नगरी में मंदिर और धरोहरें केवल धार्मिक महत्व नहीं रखतीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रमाण भी हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रभु राम का बाल्यकाल इसी नगरी में बीता और उन्होंने गुरु वशिष्ठ से शिक्षा ग्रहण की

आज भी यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। यहां आने वाले भक्त प्रभु राम की शिक्षा और जीवन के मूल्यों को याद कर त्रेतायुग की गौरवशाली संस्कृति का अनुभव कर सकते हैं।

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