जयपुर। भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला कोषल्या हितकारी...कुछ इसी तरह की गूंजें, खुशियों में झूमते गाते भक्त कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला गुरुवार को यहां विद्याधर नगर स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले राष्ट्रीय संस्थान में । मौका था तुलसी सेवा संस्थान की ओर से आयोजित  9 दिवसीय रामकथा यज्ञ महोत्सव के चौथे दिन का। 9 दिवसीय रामकथा यज्ञ महोत्सव के चैथे दिन किरीट भाईजी ने रामजन्म के प्रसंग को बडे ही रोचक ढंग से अर्थ सहित सुनाया। उन्होंने कहा कि जिनके प्रति हम आसक्ति रखते है उनकी हर चीज हमें अच्छी लगने लगती है जिस प्रकार तुलसीदास जी को राम के प्रति आसक्ति थी, तो रामजन्म के हर क्षण, वहां उपस्थित हर कण, तिथि, दिन, और समय सब को तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में नमन किया।
भाईजी ने कहा कि हम जगत को कैसे देखते है या इस जगत के लोगों के साथ कैसा व्यवहार करते है, इसका आधार हमारा स्वभाव होता है। जिस प्रकार जब राम जन्म का रामचरितमानस में तुलसीदासजी ने वर्णन किया तो सबसे पहले राम को कृपालु और दीनदयालु बताकर आगे की बात कही। भाईजी ने बहुत ही हदयस्पर्षी षब्दों से रामजन्म की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि रामजन्म के समय सरयू नदी छलकने लगी, और बिना वर्षा ऋतु के नदी के छलकने का कारण जब पूछा गया तो सरयू नदी ने कहा ये मेरा जल नहीं बल्कि प्रेमाश्रु है। भाईजी ने एक प्रसंग के दौरान कहा कि सभी लोग भगवान को खोजते रहते है, कोई किताबों में, कोई तीर्थो में। लेकिन भगवान शब्दों में नहीं षून्य में हैं। ओेर शून्य का अर्थ है अहम् यानि मैं। अर्थात भगवान मुझमें में ही उन्हें बस पहचानने की जरूरत है।
कथा आयोजक श्यामलाल बांकेबिहारी अग्रवाल ने बताया कि विद्याधर नगर स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले राष्ट्रीय संस्थान में 8 दिसम्बर से शुरू हुई कथा 16 दिसम्बर तक प्रतिदिन दोपहर 2 से 6 बजे तक चलेगी। 9 दिवसीय राम कथा के सह आयोजक जगदीश मीणा, हनुमान शर्मा और पुष्पा पुरूषोत्तम अग्रवाल ने अधिक से अधिक लोगों को कथा में भाग लेने का आहवान किया।                                                   
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